"राष्ट्र एक ऐसी महान एवं पवित्र संस्था है,जो संकल्पना रुपी प्रेरणा से जनित मानव के मूर्त विचारों का परिणाम है"!.
"परिभाषा के सहज रूप में यदि राष्ट्र कि व्याख्या कि जाए तो राष्ट्र ..........................................."!.
"राज्य व्यवस्था एवं न्यायिक प्रणाली को जिस तत्त्व द्वारा भोगोलिक सीमाएं प्राप्त होतो हैं वही राष्ट्र कहलाता है"!.
राजनीति जिसको कौटिल्य ने अर्थशाश्त्र भी कहा है "वास्तव में राष्ट्र नामक संस्था द्वारा ही प्रवर्तित किया जाता है जो प्राचीन राजतन्त्र राज्य व्यवस्था से लेकर वर्तमान लोकतान्त्रिक पद्धति तक सभ्य मानव समाज कि प्रत्येक जिज्ञासा और समस्या का समाधान उपलब्द्ध कराता है"!.
संकल्पना,विचार या राष्ट्र तथा धर्म ये मानव सभ्यता के लिए इतने ही प्राचीन हैं जितना की मानव का वर्तमान स्वरुप है,संकल्पना ऐसा तत्त्व है जो मानव के साथ--साथ पृथ्वी के दूसरे सभी प्राणियों में भी किसी न किसी रूप में पाया जाता है, विशेषतः जिन्हें सामाजिक प्राणियों की श्रेणी में रखा जाता है!.
विचार या राष्ट्र संकल्पना रुपी माता द्वारा जनित प्रथम संस्था है जिसको संकल्पना रुपी माता का जीवित पुत्र भी कह सकते हैं,इस प्रकार राष्ट्र एक सजीव संस्था या तत्त्व है जो संपूर्ण सृष्टी में व्याप्त है तथा जिसका स्वरुप महान एवं सर्व व्यापक है,क्योंकि यह केवल मनुष्य ही नहीं वल्कि पृथ्वी के अन्य सामाजिक प्राणियों में भी वैचारिक रूप से प्रवर्तन में है!.
राष्ट्र की उत्पत्ति संकल्पना द्वारा चाहे अस्थायी और तात्कालिक हो या स्थायी और पूर्ण कालिक हो इसमें धर्म,जाती,वर्ण,रंग-रूप,तथा अर्थ की भूमिका कभी नहीं होती, और न ही होनी चाहिए,क्योंकि अगर भूल से भी ये तत्त्व राष्ट्र या राष्ट्रीय विचारधारा में में शामिल हो जायें तो राष्ट्र का विखंडन प्रारम्भ हो जाता है!.
इस तथ्य को एक उदहारण द्वारा भली-भांति समझाया जा सकता है...
एक बार एक घने वन में एक वाट वृक्ष पर वानर,भालू और गिद्ध के परिवार अलग-अलग शाखाओं पर बहुत ही सुख और शांतिपूर्वक रहते थे,उनमे न तो आपस में कोई सम्बन्ध था और न ही कोई झगड़ा था, तीनो एक दूसरे के कार्यों में कभी हस्तक्षेप नहीं किया करते थे,दुर्भाग्य से उसी वृक्ष पर कंही से एक विशाल अजगर आ गया,जिससे तीनो प्राणियों के परवारों पर दुर्भाग्यशाली संकट उत्पन्न हो गया,मगर उसके वाद वह हुआ जो कभी नहीं हुआ था,प्राण घटक अजगर को सम्मुख देखकर तीनो प्राणी अर्थात वानर,भालू,और गिद्ध इस संकट से निपटने के लिए एकजुट हो गए,और तीनो ने मिलकर अजगर को भगा दिया!,जिससे उनके परिवारों पर से संकट समाप्त हो गया!.
ये तीनो प्राणी प्रजाति,व्यवहार-विसरहन-सहन,में प्राकृतिक रूप से एक दूसरे से पूर्णतया भिन्न स्वभाव के होते हुए भी,जिस प्रेरणा से तात्कालिक संकट के समाधान के लिए एकजुट हो गए, वह संकल्पना द्वारा ही जनित थी,तीनो में एक साथ सुरक्षा के लिए एकत्रित होने के लिए जिस भावना की आवश्यकता थी उसे,....................................षित संस्था कह सकते हैं, जो की एक ही स्थान पर एक साथ और एक ही समय पर उत्पन्न हुयी थी,और आपस में पूर्णतया सामान भावना पर आधारित थी!,इसीलिए ये सम्बन्ध स्थायी सिद्ध हुए और पीढ़ी दर पीढ़ी जलते रहे,ये सम्बन्ध इन तीनो प्राणियों के लिए चाहे कोई महत्व रखते हों या नहीं मगर,मानव के लिए एक शिक्षा तथा दार्शनिकों और विद्द्वानों के लिए एक प्रारम्भिक राष्ट्र का जन्म का कारण थी!, जिसमे धर्म-प्रजाति,व्यवहार-विचार,खान-पान,रहन-सहन,रंग-रूप की भिन्नता होते हुए भी,एक स्थाई संगठन का जन्म हुआ,जो प्रारम्भिक राष्ट्र की उत्पत्ति का प्रथम उदहारण है!.
"परिभाषा के सहज रूप में यदि राष्ट्र कि व्याख्या कि जाए तो राष्ट्र ..........................................."!.
"राज्य व्यवस्था एवं न्यायिक प्रणाली को जिस तत्त्व द्वारा भोगोलिक सीमाएं प्राप्त होतो हैं वही राष्ट्र कहलाता है"!.
राजनीति जिसको कौटिल्य ने अर्थशाश्त्र भी कहा है "वास्तव में राष्ट्र नामक संस्था द्वारा ही प्रवर्तित किया जाता है जो प्राचीन राजतन्त्र राज्य व्यवस्था से लेकर वर्तमान लोकतान्त्रिक पद्धति तक सभ्य मानव समाज कि प्रत्येक जिज्ञासा और समस्या का समाधान उपलब्द्ध कराता है"!.
संकल्पना,विचार या राष्ट्र तथा धर्म ये मानव सभ्यता के लिए इतने ही प्राचीन हैं जितना की मानव का वर्तमान स्वरुप है,संकल्पना ऐसा तत्त्व है जो मानव के साथ--साथ पृथ्वी के दूसरे सभी प्राणियों में भी किसी न किसी रूप में पाया जाता है, विशेषतः जिन्हें सामाजिक प्राणियों की श्रेणी में रखा जाता है!.
विचार या राष्ट्र संकल्पना रुपी माता द्वारा जनित प्रथम संस्था है जिसको संकल्पना रुपी माता का जीवित पुत्र भी कह सकते हैं,इस प्रकार राष्ट्र एक सजीव संस्था या तत्त्व है जो संपूर्ण सृष्टी में व्याप्त है तथा जिसका स्वरुप महान एवं सर्व व्यापक है,क्योंकि यह केवल मनुष्य ही नहीं वल्कि पृथ्वी के अन्य सामाजिक प्राणियों में भी वैचारिक रूप से प्रवर्तन में है!.
राष्ट्र की उत्पत्ति संकल्पना द्वारा चाहे अस्थायी और तात्कालिक हो या स्थायी और पूर्ण कालिक हो इसमें धर्म,जाती,वर्ण,रंग-रूप,तथा अर्थ की भूमिका कभी नहीं होती, और न ही होनी चाहिए,क्योंकि अगर भूल से भी ये तत्त्व राष्ट्र या राष्ट्रीय विचारधारा में में शामिल हो जायें तो राष्ट्र का विखंडन प्रारम्भ हो जाता है!.
इस तथ्य को एक उदहारण द्वारा भली-भांति समझाया जा सकता है...
एक बार एक घने वन में एक वाट वृक्ष पर वानर,भालू और गिद्ध के परिवार अलग-अलग शाखाओं पर बहुत ही सुख और शांतिपूर्वक रहते थे,उनमे न तो आपस में कोई सम्बन्ध था और न ही कोई झगड़ा था, तीनो एक दूसरे के कार्यों में कभी हस्तक्षेप नहीं किया करते थे,दुर्भाग्य से उसी वृक्ष पर कंही से एक विशाल अजगर आ गया,जिससे तीनो प्राणियों के परवारों पर दुर्भाग्यशाली संकट उत्पन्न हो गया,मगर उसके वाद वह हुआ जो कभी नहीं हुआ था,प्राण घटक अजगर को सम्मुख देखकर तीनो प्राणी अर्थात वानर,भालू,और गिद्ध इस संकट से निपटने के लिए एकजुट हो गए,और तीनो ने मिलकर अजगर को भगा दिया!,जिससे उनके परिवारों पर से संकट समाप्त हो गया!.
ये तीनो प्राणी प्रजाति,व्यवहार-विसरहन-सहन,में प्राकृतिक रूप से एक दूसरे से पूर्णतया भिन्न स्वभाव के होते हुए भी,जिस प्रेरणा से तात्कालिक संकट के समाधान के लिए एकजुट हो गए, वह संकल्पना द्वारा ही जनित थी,तीनो में एक साथ सुरक्षा के लिए एकत्रित होने के लिए जिस भावना की आवश्यकता थी उसे,....................................षित संस्था कह सकते हैं, जो की एक ही स्थान पर एक साथ और एक ही समय पर उत्पन्न हुयी थी,और आपस में पूर्णतया सामान भावना पर आधारित थी!,इसीलिए ये सम्बन्ध स्थायी सिद्ध हुए और पीढ़ी दर पीढ़ी जलते रहे,ये सम्बन्ध इन तीनो प्राणियों के लिए चाहे कोई महत्व रखते हों या नहीं मगर,मानव के लिए एक शिक्षा तथा दार्शनिकों और विद्द्वानों के लिए एक प्रारम्भिक राष्ट्र का जन्म का कारण थी!, जिसमे धर्म-प्रजाति,व्यवहार-विचार,खान-पान,रहन-सहन,रंग-रूप की भिन्नता होते हुए भी,एक स्थाई संगठन का जन्म हुआ,जो प्रारम्भिक राष्ट्र की उत्पत्ति का प्रथम उदहारण है!.
