चिंता किसको आज यहाँ,माटी का क़र्ज़ चुकाने की.
कोशिस करते हैं सभी यहाँ,माता का दर्द बढाने की.
जिस पथ पर चलता जाता है नेतृत्व देश का आज सभी.
मुझको लगता है ये साजिश है भारत को भरमाने की.
सोमवार, 16 नवंबर 2009
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