गुरुवार, 12 नवंबर 2009

ज्ञान तत्त्व

पिछड़े व शोषित वर्ग के समाज सुधारकों और महापुरुषों ने भारतीय सामाजिक व धार्मिक भेद-भाव तथा असमानता से खिन्न होकर उसके प्रति विरोध प्रकट करने के लिए या फिर किसी भी और अवश्यंभावी कारण से अपना धर्म तक परिवर्तित कर डाला,जिसका प्रारम्भ उच्च क्षत्रिय वर्ग लोगो द्बारा हुआ,जिनमे तीर्थंकरों ऋषभदेव और महावीर स्वामी द्बारा जैन धर्म का कि स्थापना,सिद्धार्थ जो बाद मे महात्मा बुद्ध कहलाये द्वारा बौध धर्म कि स्थापना तथा गुरु नानक जिन्होंने सिख धर्म को स्थापित किया प्रसिद्ध हैं और सभी का सम्बन्ध क्षत्रिय समाज या राज परिवारों से रहा है,इन्ही के धर्म को बाद मे दलित और शोषित तथा पिछड़े वर्ग के महापुरुषों व समाजसुधारकों ने भी अपना लिया और भारतीय सनातन धर्म से अलग होकर भारतीय समज व्यवस्था के प्रति अपना विरोध प्रकट किया.

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