गुरुवार, 12 नवंबर 2009
ज्ञान तत्त्व
ज्ञान तत्त्व - [१]:--भारत वर्ष में वर्तमान में सामाजिक समानता के सारे छदम् प्रयास जो वास्तव में राजनीतिक वर्चस्व के लिए किये जा रहे हैं और इनमे सामाजिक क्रांति और समानता तथा भेद-भाव को समाप्त करने के लिए कोई तार्किक प्रयोजन नहीं है,अभी तक सवर्णों या उच्च वर्ग के लोगों से भारत के सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछडे लोगों में विद्वेष की भावना फैलाने के अतिरिक्त और किसी भी रूप मे फलीभूत नही हुए हैं,नकारात्मक राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ती के लिए बहुसंख्यक पिछडे वर्गों को सुनहरे स्वप्न दिखाकर उनको उच्च वर्गों के विरूद्ध एकत्रित करना ही केवल आधुनिक नेतृत्व का एक मात्र प्रयास है,जिसमे वचन भंग करना और झूठे वादे करना सफलता का एक आवश्यक तत्त्व है.राजनीति के वर्तमान स्वरुप मे ये विघटन कारी त्रुटी इसलिए है क्योकि हमारे भारत वर्ष के सारे कानून,विधियां और संविधान एक ऐसे विदेशी वर्ग के लोगों ने बनाई जहाँ पर आज इनको पूरी तरह से परिवर्तित किया जा चुका है,किसी राष्ट्र के समाज में समानता लाने के लिए सामाजिक भेद-भाव और धार्मिक समानता दो महत्व पूर्ण तत्त्व होते हैं,जिसके लिए अभी तक किसी ने कोई प्रयास नहीं किया है.
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