गुरुवार, 12 नवंबर 2009

gyan tatva

सरदार भगत सिंह के फांसी के फंदे को चुमने से पहले उनकी आखिरी इच्छा पुछी गयी तब उन्होंने कहा:-"हम तीनो साथियों [सुखदेव,राजगुरु,और भगत सिंह] के हाथ खोल दिए जाएँ जिससे हम गले मिल सकें पता नहीं फिर कब तीनो की मुलाकात हो और न जाने किस रूप में हो" ये किसी के भी लिए बहुत महत्वपूर्ण बात है,जो भगत सिंह ने उपनिषदों में अध्ययन के बाद ज्ञान रूप में प्राप्त किया था,उपनिषदों में लिखा है अच्छे या बुरे कर्मों के अनुसार फल भोगने के लिए हर आत्मा मृत्यु के बाद फिर जन्म लेती है,और पिछले जन्म में उसके सहयोगी और साथी भी फिर से अगले जन्म में साथ-साथ उत्त्पन्न होकर वैसे ही अच्छे या बुरे कर्म करते हैं जैसे उन्होंने फिछले जन्म में साथ साथ किये थे,मै और मुझसे मिलने वाला मेरे साथ सहयोग करने वाला हर व्यक्ति हर जन्म में जहाँ भी जन्मा होगा उस राष्ट्र के लिए समर्पित रहा होगा,और अब समय आ गया है मेरे साथियों मेरे सन्देश का अर्थ समझिये और अति-शीघ्र मेरे साथ जुड़ जाएँ और मेरा सहयोग करें,वर्तमान में गंगा बचाओं अभियान और भारत की सामरिक शक्ति को अमेरिका के हितों के अनुसार कम करने के विरूद्व जन आन्दोलन कि आवश्यकता है,जिसके लिए मुझे आपका सहयोग चाहिए.

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