नज़रें देश से चुराने की जिन्हें आदत है,अफसोस वही देश की आज विरासत हैं.
दिया कुछ नहीं जिन्होंने कभी दर्द के सिवा,आज उन्ही की हर तरफ सियासत है.
दो बूंद खून की कभी जिनकी गिरी नहीं,देश भक्तों से ही उनको अब शिकायत है.
विधाता ने क्या लिख दिया है मोल तेरा,गैरों की अमीरी पर उनकी नजारत है
सोमवार, 16 नवंबर 2009
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